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सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के पà¥à¤°à¤•ारों में शामिल हैं:
à¤à¤‚किलोसिंग सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸:
इसमें रीढ़ और पेलà¥à¤µà¤¿à¤¸ में सूजन आ जाती है जिससे पीठमें सूजन à¤à¥€ हो जाती है। यह आमतौर पर 45 साल की उमà¥à¤° में शà¥à¤°à¥‚ होता है और यह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° समय निरंतर गतिविधि से बेहतर होता है लेकिन आराम करने से नहीं।
जैसे-जैसे समय बीतता है सूजन से à¤à¤‚किलोसिस हो सकता है जो रीढ़ में नई हडà¥à¤¡à¥€ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होता है। इस पà¥à¤°à¤•ार रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ को सà¥à¤¥à¤¿à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सà¥à¤¥à¤¿à¤° करना।
à¤à¤‚टरोपैथिक गठिया:
यह सूजन आंतà¥à¤° रोग से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है। इसमें आंत की सूजन होती है और इसमें आंतà¥à¤° शामिल होता है जो फिर से à¤à¤‚टरोपैथिक गठिया की à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– विशेषता है।
इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में पेट दरà¥à¤¦, वजन घटना, दीरà¥à¤˜à¤•ालिक दसà¥à¤¤, मल में खून आना शामिल हैं।
सोरियाटिक गठिया:
इसमें हाथ-पैर के जोड़ों में लगातार सूजन और दरà¥à¤¦ बना रहता है। कà¥à¤› लोगों में सोरियाटिक अरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के कारण तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर रैशेज à¤à¥€ हो जाते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ रीढ़ में अकड़न à¤à¥€ होती है।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² गठिया:
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² गठिया में आंत या मूतà¥à¤° पथ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। इससे जोड़ों, आंखों, जननांगों, मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯, शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ में सूजन और दरà¥à¤¦ à¤à¥€ हो सकता है।
किशोर सà¥à¤ªà¥‹à¤‚डिलोआरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸:
ये लकà¥à¤·à¤£ बचपन में शà¥à¤°à¥‚ होते हैं और सामानà¥à¤¯ सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ की तरह दिखते हैं। इसमें टेंडन या लिगामेंट के मिलने वाली जगह पर सूजन आ जाती है।
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